तुम्हे रासेश्वरी कहूँ या सुरसिका

तुम्हे रासेश्वरी कहूँ या सुरसिका
अतुलनीय सौंदर्यसम्राज्ञी  या अनुपमेय प्रिया।।

अग्नी में दाहरूपी, सूर्य में प्रभारूपी
चंद्रमे शोभारूपी, कमलमे  शोभनारूपी
ज्ञान समृद्धी संपत्ती सगुण यशबल
सर्वशक्तिमान ‘भग’ रूपी भगवती

तुम्हें रासेश्वरी कहू या सुरसिका
अतुलनीय सौंदर्यसम्राज्ञी या अनुपमेय प्रिया।।

कहूँ स्वेच्छामय परमानंदरूपी
या स्वयंप्रकाशित ज्योतिरुपी
शक्तीरूपी तुम बुद्धिमान कुपी
परमकांतिमान तुम शांतिप्रिया

तुम्हें रासेश्वरी कहूँ या सुरसिका
अतुलनीय सौंदर्यसम्राज्ञी  या अनुपमेय प्रिया।।

प्रियभाषिणी शतचंद्रप्रभा
सकल चराचर में सृष्टीदेवा:
प्रकृती कहूँ या प्राणवल्लभा
वंदनीय पूज्य भगवती नमोनम:

तुम्हें रासेश्वरी कहूँ या सुरसिका
अतुलनीय सौंदर्यसम्राज्ञी या अनुपमेय प्रिया।।

नेहा भांडारकर

 115 total views,  2 views today

One thought on “तुम्हे रासेश्वरी कहूँ या सुरसिका”
  1. मां दुर्गा कि बिभिन्न रूप का बर्णना खुब सुन्दर है, नेहा बहन ।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *