October 17, 2021
11 11 11 AM
*ସନ୍ଧ୍ୟା ଗୋ ତୁମେ -ହୃଦୟ ରଂଜନ ପରିଡା *
*ଋକୁଣା ରଥ – ଦିଲ୍ଲୀପ୍ କୁମାର ନନ୍ଦୀ*
*ନାରୀ ନାରାୟଣୀ – ସସ୍ମିତା ବେହେରା*
*ଫେରିବାର ବେଳ – ନଗେନ୍ଦ୍ର କୁମାର ରାଉତ*
*ମା ଦୁର୍ଗା – ସ୍ୱାଗତିକା ସାହୁ*
*ସଂସ୍କୃତି ଆଜି ଧକେଇ କାନ୍ଦୁଛି – ଶକ୍ତିଦା ବିଷୋୟୀ*
*ନବ ଦୂର୍ଗା – ଶକ୍ତିଦା ବିଷୋୟୀ*
*ମାଆ – ଇନ୍ଦୁପ୍ରଭା ବିଶ୍ୱାଳ*
*WORLD OF LOVE-Prof.Dr.Prasana Kumar Dalai*
*ବିଦ୍ୟାଦାତା ଗଣେଶ – ସରସ୍ବତୀ ନାୟକ*
*ମହାମାୟୀ – ଜଗଦୀଶ ଶତପଥୀ*
*ଚାନ୍ଦ ମୁହିଁ –  ଇଂ .ବିଚିତ୍ରାନନ୍ଦ ମୁନୀ*
*TOGETHER AS ONE-Dr.Prasana Kumar Dalai*
*YOU WILL BE MINE- Dr.Prasana Kumar Dalai*
*ଶରତ ଆସିଛି-ଜଗଦୀଶ ଶତପଥୀ*
*ମଉଳା ଫୁଲର ବାସ୍ନା-ସନ୍ତୋଷ କୁମାର ଅଟୀ*
*କୁରଙ୍ଗିର ଭିନ୍ନ ବେଶ – ସନ୍ତୋଷ କୁମାର ଅଟୀ*
*ଧୂସର – ସ୍ରୋତସ୍ବିନୀ ପରିଡା*
*ଦେଖିଛି ଦେବୀଙ୍କୁ – ଶିବାନନ୍ଦ ବାରିକ*
*ମାଆ ସିଦ୍ଧିଦାତ୍ରୀ -ଜାନକୀ ମହାନ୍ତ*
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*ସନ୍ଧ୍ୟା ଗୋ ତୁମେ -ହୃଦୟ ରଂଜନ ପରିଡା * *ଋକୁଣା ରଥ – ଦିଲ୍ଲୀପ୍ କୁମାର ନନ୍ଦୀ* *ନାରୀ ନାରାୟଣୀ – ସସ୍ମିତା ବେହେରା* *ଫେରିବାର ବେଳ – ନଗେନ୍ଦ୍ର କୁମାର ରାଉତ* *ମା ଦୁର୍ଗା – ସ୍ୱାଗତିକା ସାହୁ* *ସଂସ୍କୃତି ଆଜି ଧକେଇ କାନ୍ଦୁଛି – ଶକ୍ତିଦା ବିଷୋୟୀ* *ନବ ଦୂର୍ଗା – ଶକ୍ତିଦା ବିଷୋୟୀ* *ମାଆ – ଇନ୍ଦୁପ୍ରଭା ବିଶ୍ୱାଳ* *WORLD OF LOVE-Prof.Dr.Prasana Kumar Dalai* *ବିଦ୍ୟାଦାତା ଗଣେଶ – ସରସ୍ବତୀ ନାୟକ* *ମହାମାୟୀ – ଜଗଦୀଶ ଶତପଥୀ* *ଚାନ୍ଦ ମୁହିଁ –  ଇଂ .ବିଚିତ୍ରାନନ୍ଦ ମୁନୀ* *TOGETHER AS ONE-Dr.Prasana Kumar Dalai* *YOU WILL BE MINE- Dr.Prasana Kumar Dalai* *ଶରତ ଆସିଛି-ଜଗଦୀଶ ଶତପଥୀ* *ମଉଳା ଫୁଲର ବାସ୍ନା-ସନ୍ତୋଷ କୁମାର ଅଟୀ* *କୁରଙ୍ଗିର ଭିନ୍ନ ବେଶ – ସନ୍ତୋଷ କୁମାର ଅଟୀ* *ଧୂସର – ସ୍ରୋତସ୍ବିନୀ ପରିଡା* *ଦେଖିଛି ଦେବୀଙ୍କୁ – ଶିବାନନ୍ଦ ବାରିକ* *ମାଆ ସିଦ୍ଧିଦାତ୍ରୀ -ଜାନକୀ ମହାନ୍ତ*

*गालियों का शोर तालियों के गूंज में छिप जाएगा — सुप्रजित कुमार साहू*

वक्त का यह नज़र अंदाज़

आंखों में आसुयों के अंगड़ाई

बेवक्त का यूं सामना

तुझे करना होगा भाई…..

बेसहारा चिराग जल- जल के जब

सूरज बन जाएगा,

गालियों का शोर

तालियों के गूंज में छिप जाएगा…….।

 

रात ढलेगी बात बनेगी

शाम गाएगी गीत,

हार न मानो चार दिनोका

कोहरा होगा मित…।

हो खफा वह किस्मत पर संघर्ष हाथ थामेगा

हो सफ़र दर्द भरी फिर मंजिल रंग लाएगा…..।

मौन- गिद्ध जब मगर मच्छ को

पंजे में ले जाएगा…..

गालियों का शोर

तालियों के गूंज में छिप जाएगा…………।

तपता सोना बनता कुंदन

पत्थर बनता मूरत

हर घर हर मन आइने में

होगी तेरी सूरत,

जो ख्वाब देखे वह नादान आंखे

सपनो से चुरालेगा

आंख न खोलो अंतर्मन में

खुद ही खुद को पाएगा,

हवा तो हवा तू मुट्ठी भर में

जब गगन भी आएगा

गालियों का शोर

तालियोंवक्त का यह नज़र अंदाज़

आंखों में आसुयों के अंगड़ाई

बेवक्त का यूं सामना

तुझे करना होगा भाई…..

बेसहारा चिराग जल- जल के जब

सूरज बन जाएगा,

गालियों का शोर

तालियों के गूंज में छिप जाएगा…….।

 

रात ढलेगी बात बनेगी

शाम गाएगी गीत,

हार न मानो चार दिनोका

कोहरा होगा मित…।

हो खफा वह किस्मत पर संघर्ष हाथ थामेगा

हो सफ़र दर्द भरी फिर मंजिल रंग लाएगा…..।

मौन- गिद्ध जब मगर मच्छ को

पंजे में ले जाएगा…..

गालियों का शोर

तालियों के गूंज में छिप जाएगा…………।

तपता सोना बनता कुंदन

पत्थर बनता मूरत

हर घर हर मन आइने में

होगी तेरी सूरत,

जो ख्वाब देखे वह नादान आंखे

सपनो से चुरालेगा

आंख न खोलो अंतर्मन में

खुद ही खुद को पाएगा,

हवा तो हवा तू मुट्ठी भर में

जब गगन भी आएगा

गालियों का शोर

तालियोंवक्त का यह नज़र अंदाज़

आंखों में आसुयों के अंगड़ाई

बेवक्त का यूं सामना

तुझे करना होगा भाई…..

बेसहारा चिराग जल- जल के जब

सूरज बन जाएगा,

गालियों का शोर

तालियों के गूंज में छिप जाएगा…….।

 

रात ढलेगी बात बनेगी

शाम गाएगी गीत,

हार न मानो चार दिनोका

कोहरा होगा मित…।

हो खफा वह किस्मत पर संघर्ष हाथ थामेगा

हो सफ़र दर्द भरी फिर मंजिल रंग लाएगा…..।

मौन- गिद्ध जब मगर मच्छ को

पंजे में ले जाएगा…..

गालियों का शोर

तालियों के गूंज में छिप जाएगा…………।

तपता सोना बनता कुंदन

पत्थर बनता मूरत

हर घर हर मन आइने में

होगी तेरी सूरत,

जो ख्वाब देखे वह नादान आंखे

सपनो से चुरालेगा

आंख न खोलो अंतर्मन में

खुद ही खुद को पाएगा,

हवा तो हवा तू मुट्ठी भर में

जब गगन भी आएगा

गालियों का शोर

तालियोंवक्त का यह नज़र अंदाज़

आंखों में आसुयों के अंगड़ाई

बेवक्त का यूं सामना

तुझे करना होगा भाई…..

बेसहारा चिराग जल- जल के जब

सूरज बन जाएगा,

गालियों का शोर

तालियों के गूंज में छिप जाएगा…….।

 

रात ढलेगी बात बनेगी

शाम गाएगी गीत,

हार न मानो चार दिनोका

कोहरा होगा मित…।

हो खफा वह किस्मत पर संघर्ष हाथ थामेगा

हो सफ़र दर्द भरी फिर मंजिल रंग लाएगा…..।

मौन- गिद्ध जब मगर मच्छ को

पंजे में ले जाएगा…..

गालियों का शोर

तालियों के गूंज में छिप जाएगा…………।

तपता सोना बनता कुंदन

पत्थर बनता मूरत

हर घर हर मन आइने में

होगी तेरी सूरत,

जो ख्वाब देखे वह नादान आंखे

सपनो से चुरालेगा

आंख न खोलो अंतर्मन में

खुद ही खुद को पाएगा,

हवा तो हवा तू मुट्ठी भर में

जब गगन भी आएगा

गालियों का शोर

तालियों के गूंज में छिप जाएगा……।

के गूंज में छिप जाएगा……।

के गूंज में छिप जाएगा……।

के गूंज में छिप जाएगा……।

 

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